Israel Palestine conflict 2021 – इजराइल और पलिस्तीन के बिच संघर्ष (Who is right) ?

फिलीस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने गाजा पट्टी, वेस्ट बैंक और यरुशलम में जारी हिंसा की निंदा की और इसके लिए इजराइल को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो – बाइडेन से इस मामले को सुलझाने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इजराइल और गाजा से तत्काल प्रभाव से हिंसा रोकने की अपील की है ,संघर्ष के दौरान वेस्ट बैंक पर हिंसा में सात फिलीस्तीनियों की मौत हो गई ,———

या खुदा रहम !

ये सब बकवास बाते है ,क्या आप सभी को पता है की इस संघर्ष के बिच आखिर मुदा क्या है ?
आइये जानते है।

इजराइल और पलिस्तीन के बिच संघर्ष – Introduction

ये शायद कोरोना से भी बड़ी जंग है।

दोस्तों इज़राइल और पलिस्तीन के बिच का संघर्ष एक बार फिर से जोरो-शोरो से चल पड़ा है। Coronavirus जैसी महामारी के चलते हुए भी ये देश इस कदर एक दूसरे का खून बहा रहे हो तो साफ है की , झखम बहोत गहरा है।इसराइल और पलिस्तीन के बिच विवाद अब दुनिया के लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं है , ये दोनों देश पहले भी कई बार इस तरह एक दूसरे का खून बहा चुके है , पर सवाल ये है की आखिर क्यों ये दोनों देश इस कदर बार-बार जंग के मैदान में आकर खड़े हो जाते है।

Who Is Right ? – आखिर सही कौन है ?

हालाकी दोस्तों एक BUS और BIKE की टककर में जिस तरह बाइक स्वर व्यक्ति को ही दोषी बताया जाता है , उसी तरह लोग इस वक़्त बिना बात की गहराई को जाने अपनी राय के हिसाब से दोनों देशो को सही और गलत ठहरा रहे है।

Map Of Israel – The Palestinians Historic Compromise –

अगर इस Map पर गौर किया जाए तो आपको ये साफ समझ आजाएगा की , क्यों पलिस्तीन और इजराइल के बिच ये इतना गहरा आपसी मतभेद है।

Index –

  • इजराइल और पलिस्तीन के बिच संघर्ष – Introduction
    • ये शायद कोरोना से भी बड़ी जंग है।
    • Who Is Right ? – आखिर सही कौन है ?
    • Map Of Israel
  • जानिए पलिस्तीन और यहूदियों के बारे में विस्तार से –
    • संघर्ष जो इसा मसीह के जन्म से भी पुराना है !
    • खुद इसा मसीह ने चुना था पलिस्तीन का क्षेत्र यहूदियों के लिए !
    • पलिस्तीन वासी मूल निवासी –
  • रोमन वॉर और यहूदियों के बुरे समय की शुरुआत
    • एकजोड़स – यहूदीयो को छोड़ना पड़ा पलिस्तीन !
    • एंटी – सेमिटिज़म – दुःख और दुरव्यवहार जो शायद ही किसी और धर्म ने सहा हो !
    • Davide Star निति – दलित छुआछूत की तरह मत – भेद !
  • 1860 – वियना के थियोडर हर्जल का जन्म
    • हर्ज़ल – छोड़ना पड़ा खुद अपना ही घर !
    • 1890 – फ़्रांस और रूस के बिच युद – अल्फर्ड ड्रेफर्स !
    • अल्फर्ड – जांच से शुर हुआ हर्जल का सफर !
  • जायनिस्ट कांग्रेस – स्वर्ग की कांग्रेस !
    • 1897 – जायनिस्ट कांग्रेस
    • 1904 – हर्जल की मृत्यु पर – आग नहीं भुजने वाली थी !
    • ऑटोमन साम्राज्य – और ब्रिटेन
    • 1916 बाल्फोर समझौता – फूट डालो और राज करो निति !
  • 1920 – हिटलर और प्रथम विश्वयुद्ध !
    • 1933 – जर्मनी सत्ता पर कब्ज़ा और यहूदी नरसंहार !
    • 1939 -1945 – 1/3 यहूदी आबादी को मार दिया गया !
  • यहूदीयो की एक बार फिर घर वापसी –
    • 1878 To 1978 – एक नजर आबादी के आकड़ो पर भी !
    • भविषय का डर और पलिस्तीनियो के मन में भी लगी आग !
    • 29 November 1947 – ग्रीन लाइन
      • द्विराष्ट सिद्धांत
      • यरुशलम अंतरराष्ट्रीय शहर घोषित
    • 14 May 1948 – Rises Of Israel Empire
      • अदभुत जंग – इज़राइल और अरब देशो के बिच जंग !
      • समझौते से ज्यादा भूमि पर इजराइल ने किया कब्ज़ा –
      • 11 May 1949 – संयुक्त राष्ट्र की मान्यता !
    • 1967 – 6 दिन में 6 देशो को हराया !
      • 1964  – PLO – Palestine Liberation Organization
      • 1967 – THE SIX DAY WAR
      • गोलन हाइट्स, सिनाई प्रायद्वीप वेस्ट बैंक तथा पूर्वी येरुशलम OR गाजा पट्टी पर इजराइल का कब्ज़ा
      • खार्तूम बैठक – Three Nos (तीन नकारात्मक सिद्धांत )
    • समझौते की शुरुआत !
      • 1979 – मिस्र इज़राइल समझौता
      • 1991 -मैड्रिड सम्मेलन
      • 1992 – हमास (हरकत अल-मुकावामा अल-इस्लामिया)
      • 1994 – जॉर्डन इज़राइल समझौता
    • इजराइल और पलिस्तीन के संघर्ष का निष्कर्ष –

जानिए पलिस्तीन और यहूदियों के बारे में विस्तार से –

संघर्ष जो इसा मसीह के जन्म से भी पुराना है !

दोस्तों ये संघर्ष आज – कल की बात होती तो हम इस पर शायद आसानी से निर्णय ले पाते के की किस पक्ष की गलती है , पर ठहरिये की आपक्को पता है की ये संघर्ष इसा मसीह के जन्म से भी पुराना है। जी है दोस्तों ये सघर्ष इसा मसीह के पहले से चलता आ रहा है , हा पर हालत काफी बदल चुके है।

खुद इसा मसीह ने चुना था पलिस्तीन का क्षेत्र यहूदियों के लिए !

दोस्तों यहूदियों ने इस क्षेत्र को यु ही अपना नहीं मानते आरहे है , क्या आपको पता है की यहूदियों को ये जगह खुद इसा मसीह ने सोपि थी , जी हा इसा मसीह ने रोमन साम्राज्य के समय ये क्षेत्र यहूदी लोगो को सपा था , इसा मसीह का जन्म भी वर्तमान जेरूसलम के बैथलेहम में हुआ था।

पलिस्तीन वासी मूल निवासी –

अपना घर या निवास स्थान किसे पायरा नहीं होता , जी हा दोस्तों यही से ये मुद्दा धीरे – धीरे गर्माने लगा , पलिस्तीन के लोगो का मानना था की , वो इस क्षेत्र के मूलनिवासी थे ,इसलिए ये सरजमीन उनकी है , और काफी हद तक उनकी ये बात भी सही सबित होती नजर आती है।

रोमन वॉर और यहूदियों के बुरे समय की शुरुआत –

एकजोड़स – यहूदीयो को छोड़ना पड़ा पलिस्तीन !

दोस्तों पलिस्तीनियो के मन में ये मूल निवासी होने की भावना शायद कभी पनपती ही नहीं ,पर रोमन साम्राज्य के विस्तार के समय यहूदियों का इस क्षेत्र पर अपना अधिकार नहीं रहा , रोमन साम्राजय ने इसा मसीह ने जो जगह यहूदी लोगो के लिए चुनी थी , उस पर भी कब्ज़ा कर लिए था , और इसके परिणाम स्वरुप यहूदियों को अपना घर छोड़ना पड़ना।
यही से यहूदियों के बुरे समय के शुरुआत हुई इतिहास मैं यहूदियों के इस तरह अपना घर छोड़ने के प्रक्रिया को एकजोड़स का नाम दिया गया।

एंटी – सेमिटिज़म – दुःख और दुरव्यवहार जो शायद ही किसी और धर्म ने सहा हो !

एक्जोडस तो बस शुरुआत थी , आगे का सफर बद से भी बदतर था , एकजोड़स के बाद दुनिआ भर के लोगो मैं ये वहम फेल गया की , यहूदी जो लोग है वो भोत ही चालक किस्म के होते है , और उन पर किसी भी तरीके से विस्वास किआ जाना संभव नहीं , इसे इतिहास मैं एंटी – सेमिटिज़म का नमा दिया गया।
मजबूरन यहूदी लोगो को ये ष्ण पड़ा क्योकि उनके पास रहने का कोई एक निश्चित स्थान नहीं था , हालत दिन भर दिन बदलते गए – कई देशो ने ये कानून ही बना लिए की कोई भी यहूदी अपनी पहचान छुपता है तो उसे सजा दी जाए।

Davide Star निति – दलित छुआछूत की तरह मत – भेद !

एक आम नागरिक से लेकर एक ख़ुफ़िया अधिकारी तक की पहचान सार्वजानिक कर दी गई , छुआछूत जैसा माहौल पैदा हो गया , यही नहीं फौज मैं काम करने वाले यहूदी सैनिको की वर्दी पर उनकी पहचान के लिए एक तारे के चिन्ह की व्यवस्था शुरू हुई , जिसे डेविड स्टार का नाम दिया गया।
दोस्तों ये चिन्ह कोई बहादुरी का प्रतिक नहीं बल्कि , एक निस्क्रिमणिये नजर की सजा थी।

1860 – वियना के थियोडर हर्जल का जन्म

हर्ज़ल – छोड़ना पड़ा खुद अपना ही घर !

सं 1860 वियना मैं , यहूदी लोगो के लिए एक उम्मीद की किरण ने जन्म लिया , जिनका नाम सर थियोडर हर्जल था। हर्जल वियना की अख़बार संस्था मैं रिपोर्टर का काम करते थे। पर एंटी सेमिटिज़म के चलते उन्हें भी अपना देश छोड़ना पड़ा और वो जाकर फ़ांस मैं बस गए।

1890 – फ़्रांस और रूस के बिच युद – अल्फर्ड ड्रेफर्स !

1890 – युद का वह डोर जो एक बार फिर 2 देशो को युद्ध के मैदान मैं खींच लाया था। 1890 के युद मैं फ्रांस को हर का सामना करना पड़ा , पर बात यही नहीं रुकी। इस युद्ध मैं आधिकारिक रूप मैं काम कर रहे सर एल्फर्ड ड्रेफस को फ्रांस ने इस हार का कारन बता कर ,उन पर मुकदमा चला दिया।

अल्फर्ड – जांच से शुर हुआ हर्जल का सफर

फ्रांस के एक अख़बार मैं बतौर रिपोर्टर काम करते हुए , सर हर्जल ने सर अल्फर्ड की स्टोरी को कवर किआ और उनका शक हक्कीत मैं बदल गया जब उन्होंने पाया की एल्फर्ड निर्दोष थ। अब उनके दिमाग मैं एंटी – सेमिटिज़म को लेकर जो हवाए चल रही थी उन्होंने तूफान का रुख ले लिया , अंदर – अंदर ये बात सच सी थी की सर अल्फर्ड के यहूदी होने के कारन ही उन्हें इस युद्ध मैं दोषी साबित किआ गया था। और यह से शुरू हुआ सर हरजेल का सफर।

जायनिस्ट कांग्रेस – स्वर्ग की कांग्रेस !

1897 – जायनिस्ट कांग्रेस का गठन –

सर हर्जल के दिमाग मैं एक स्वतंत्र राष्ट्र निम्न की सोच पनप चुक्की थी। इसलिए उन्होंने 7 साल के निरनतर प्रयास के बाद 1897 -स्विज़रलैंड मैं ज्यानिस्ट कांग्रेस का गठन किआ , यहूदी लॉगो की हिब्बु भाषा मैं इसका अर्थ स्वर्ग से था।
उन्होंने देश – विदेश और दुनिया भर के यहूदी लोगो को इस से जोड़ना शुरू किआ , इस संस्था का प्रभाव इस कदर बद रहा था की दुनिया भर के यहूदी लोग इसके विकास मैं दान देने लगे थे।

यही नहीं हार साल इस संगठन द्वारा एक वैश्विक सम्मेलन का आयोजन किआ जाता था जिसमे दुनिया भर के यहूदी लोग भाग लेते थे।

1904 – हर्जल की मृत्यु पर – आग नहीं भुजने वाली थी !

दोस्तों चिंगारी अब आग बन चुकी थी , और वो अब भुजने का नाम नहीं ले रही थी , 1904 मैं सर हर्जल की दिल की बीमारी से मोत हो गई , दुनिया की नज़र मैं ज्यानिस्ट कांग्रेस का लीडर मर गया था, पर यहूदी लोगो के दिल मैं ये संस्था जीने लहि थी। परिणाम स्वरुप सर हर्जल की चिंगारी आग बन कर आगे बढ़ने लगी।

ऑटोमन साम्राज्य – और ब्रिटेन

जिसे हम आज फिलिस्तीन या इजराइल कह रहे है , वो वाकई मैं तब ऑटोमन साम्राज्य के रूप मैं जाना जाता था। तुकी और उस के पास का पूरा हिस्सा इस साम्राज्य मैं शामिल था , और ब्रिटेन की उस समय की नीतिया मुजे इस आर्टिकल मैं बया करने की ज़रूरत नहीं है शायद। ब्रिटेन ऑटोमन साम्राज्य चाहता था , पर चालक ब्रिटेन ये जनता था की , यहूदी लोगो के मन मैं लगी आग को कैसे काम मैं लिया जाए।

1916 बाल्फोर समझौता – फूट डालो और राज करो निति !

सं 1916 मैं ब्रिटेन और ज्यानिस्ट कांग्रेस के बिच बाल्फोर समझौता हुआ , इस समझौते मैं ब्रिटेन ने यहूदी लोगो की मानसिकता का फायदा उठाया , और फुट डालो राज करो की नित्ति को यह भी अपनाया।
इस समझौते मैं ब्रिटेन ने एक सक्षम सम्राज्य होने के नाते यहूदी लोगो से वादा किआ की अगर उनकी मदद से वो ऑटोमन साम्राज्य जित गया तो उन्हें एक स्वतंत्र देश बसा कर देगा।

पर युद्ध जितने के बाद ब्रिटेन ने अपने वादों मैं बदलाव किआ , उसने देश बना केर देने के वादे से हाथ खींचते हुए , यहूदी लोगो को फिर एक बार एक तरफ़ा रूप से बसाना शुरू किआ , भरी तादाद मैं यहूदी लोगो ने फिर एक बार पलिस्तीन की सर जमीं पर घर वापसी की।

1920 – हिटलर और प्रथम विश्वयुद्ध !

सं 1920 मैं हिटलर ने प्रथम विश्व युद्ध मैं अपनी नाज़िया सेना से नर संहार मचा दिया , शरण के लिए यहूदी लोगो को फिर एक बार अपने देश की याद आयी और उन्होंने पलिस्तीन मैं जाकर अपने लोगो के बिच बसना शुरू किआ।

1933 – जर्मनी सत्ता पर कब्ज़ा और यहूदी नरसंहार !

सं 1933 मैं हिटलर ने जर्मनी की सत्ता पर अपना कब्जा कर लिआ। जिसके परिणामस्वरू उसने फिर एक नरसंहार मचा दिए। और हिटलर ने यहूदियों का नमो निशान मिटा देने की अपनी निति पर अमल शुरू किआ।

1939 -1945 – 1/3 यहूदी आबादी को मार दिया गया !

सं 1939 से 1945 , जब दूसरे विश्व युद्ध का आगाज हुआ , उस समय ६ साल के अंदर हिटलर और उसकी सेना ने करीब 60 लाख यहूदी लोगो को मर दिआ। जो पूरी दुनिया मैं यहूदियों की संख्या का 1/3 भाग थी।इस संख्या मैं करीब 15 लाख बच्चे और 45 लाख बड़े लोग शामिल थे।

यहूदीयो की एक बार फिर घर वापसी –

पूरी दुनिया खु की प्यासी हो चुकी थी , सर पर छत नहीं थी खाने को कुछ मिल नहीं रहा था , इस परेशानियों मैं यहूदी लोगो ने वापस अपने घर लौटने की योजना बनाई और एक बार फिर भरी तादाद मैं यहूदी लोग पलिस्तीन की सा जमीं पर बस गए।

1878 To 1978 – एक नजर आबादी के आकड़ो पर भी !

1878 मैं पलिस्तीन मैं करीब 87 % मुस्लिम , 10 % ईसाई और 3% यहूदी थे , पर पिछले 100 सालो मैं यहूदी लोगो की आबादी 3% से बड़ कर 30 % हो गई थी।जो की किसी भी धर्म के लोगो की तादाद मैं एक आक्समिक रूप से बढोतरी थी।

भविषय का डर और पलिस्तीनियो के मन में भी लगी आग !

दोस्तों इस तरह पिछले कुछ डेस्को मै बढ़ती हुई इस आबादी को देख कर कर , पलिस्तीनियो के मन मै भी अब अपने भविष्ये का डर था। क्योकि संसाधन हर हाल मै सिमित थे और आबादी करीब दुगनी तेजी से बड़ रही थी। भले ही यहूदी लोग अपनी जान बचाने के लिए यहां ऐ हो पर अब पिछली कुछ सदियों से यहां यहूदी लोगो से ज्यादा पलिस्तीनी लोग रह रहे थे।

29 November 1947 – ग्रीन लाइन – द्विराष्ट सिद्धांत

दोनों धर्मो के बिच अब खींचा तानी शुरू होने लगी थी। 1947 तक तो ये इतनी बड़ गई थी की इन पर राज कर रहे ब्रिटेन को भी यहां से अपनी सेना हटाने पर मजबूर होना पड़ा। और परिणाम स्वरुप संयुक्त राष्ट्र ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए द्विराष्ट सिद्धांत दिया। दोनों देशो के बिच अब ग्रीन लाइन रेखा बना दी गई।और दोनों देशो के बिच अब सीमाओं का निर्धारण हो गया। यहूदी लोगो ने इस प्रस्ताव को हाथो हाथ स्वीकार कर लिआ पर , पलिस्तीनी लोग इस से न खुश नजर आरहे थे।

यरुशलम अंतरराष्ट्रीय शहर घोषित –

यरूशलम को अंतर राष्ट्रीय शहर घोषित किआ गया , यानि यरूशलम पर संयुक्त राष्ट्र और सैन्य ब्लो का पहरा था।

14 May 1948 – Rises Of Israel Empire

अदभुत जंग – इज़राइल और अरब देशो के बिच जंग !

यहूदी लोग इस बात से खुश थे की उन्हें सर जमीं मिल गई , है तो उधर पलिस्तीन लोग और क्षेत्र सहायता इकठा करने मै लगे थे। उन्होंने अरब देशो से सहायता हासिल की इस बार सीरिया ,लीबिया ,इराक ,मिस्र ,सऊदी अरब , इन 5 अरब देशो ने मिल कर यहूदी लोगो पर हमला किआ।साल भर चले इस युद्ध में कोई परिणाम नहीं मिला। ,युद्ध को विराम देते हुए ,जॉर्डन और यहूदी क्षेत्र मै बटवारा किआ गया।

समझौते से ज्यादा भूमि पर इजराइल ने किया कब्ज़ा –

यहूदी लोगो ने अपने क्षेत्र का विस्तार करते हुए , समझौते से ज्यादा भूमि पर कब्जा किआ। 14 MAY 1948 मै इजराइल स्वतंत्र देश के रूप मै सामने आया। 11 May 1949 – संयुक्त राष्ट्र की मान्यता से इजराइल एक स्वतंत्र देश के रूप में सामने आया।

1964  – PLO – Palestine Liberation Organization

Palestine Liberation Organization – फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन

सं 1964 में पलिस्तीनियो द्वारा पलिस्तीनी मुक्ति संगठन की स्थापना की गई। करीब 100 से ज्यादा देशो ने माना की यही संगठन पलिस्तीनो की मुक्ति के लिए एक वैद्यानिक संगठन है।
पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल इस संगठान को आतंकवादी संगठन मान ने लगे। सं 1991 मैड्रिड सम्मेलन में इस एक वैद्यानिक संगठन के रूप मैं मान्यता मिली।दुनिया की नजर मैं भले ही ये एक आतंकवादी संगठन हो पर , कोशिश ये संगठन भी अपनी आज़ादी और जमी के लिए कर रहा था।

1967 – 6 दिन में 6 देशो को हराया !

1967 – THE SIX DAY WAR

5 june 1967 TO 10 June 1967 – प्रसीद सिक्स डे वॉर – से आखिर कौन बेखबर है , अकेले इजराइल ने सीरिया , लीबिया , मिस्र , और बाकि अरब देशो को इस जंग मैं हरा दिए था। इस युद के बाद इजराइल ने यहूदियों की पवित्र भूमि यरुसलम को भी अपने कब्जे मैं ले लिए था। युद्ध मैं मात्र 6 दिन मैं इजराइल विश्व विजेता के रूप मैं सामने आया था।

गोलन हाइट्स, सिनाई प्रायद्वीप वेस्ट बैंक तथा पूर्वी येरुशलम OR गाजा पट्टी पर इजराइल का कब्ज़ा –

1967 के युद्ध के बाद इज़राइल ने गोलन हाइट्स, सिनाई प्रायद्वीप वेस्ट बैंक तथा पूर्वी येरुशलम OR गाजा पट्टी परअपना कब्ज़ा कर लिए था ,यही नहीं मिस्र का काफी भाग अब इजराइल के हाथो मैं था।

खार्तूम बैठक – Three Nos (तीन नकारात्मक सिद्धांत )

अरब देशों ने खार्तूम में आयोजित बैठक में ‘तीन नकारात्मक सिद्धांत’ (Three Nos)’ का प्रस्ताव पेश किया जिसके अंतर्गत

  1. ‘इज़राइल के साथ कोई शांति नहीं,
  2. इज़राइल के साथ कोई वार्ता नहीं ,
  3. इज़राइल को किसी प्रकार की मान्यता नहीं’ का प्रावधान था।

समझौते की शुरुआत !

1979 – मिस्र इज़राइल समझौता

26 March 1979 को वाशिंगटन DC मैं , इजराइल और मिस्र के सच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

1992 – हमास (हरकत अल-मुकावामा अल-इस्लामिया)

हमास फलीस्तीनी सुन्नी मुसलमानो की एक सशस्त्र संस्था है , जिसका उदेश्ये – इजराइल प्रशासन मैं इस्लामिक प्रशासन की स्थापना करना है। हमास का प्रभाव गाजा पट्टी पर अधिक है , जिस के एक क्षेत्रीय बॉर्डर पर इजराइल का कब्ज़ा है। 1994 के बाद से, समूह ने अक्सर कहा है कि अगर इज़राइल 1967 की सीमाओं पर किए गए देश-प्रत्यावर्तन (repatriation) को वापस ले लेता है तथा फिलिस्तीनी शरणार्थियों की वापसी का अधिकार हो तो वह क्षेत्रों में मुक्त चुनाव होने देगा।

1994 – जॉर्डन इज़राइल समझौता –

26 October 1994 – इजराइल की ताकत दिन भर दिन बढ़ रही थी , ये देखते हुए जॉर्डन ने भी इजराइल के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।

2014 – GAZA WAR _ The War Of Dead – Israel V/s Palestine –

2014 मैं इजराइल और पलिस्तीन के बिच एक भयंकर युद्ध छिड़ा था , जिसमे हज़ारो बेकसूरों ने अपनी जान गवा दी थी।2014 मैं ये युद्ध इसराइल द्वारा , हमास द्वारा किडनेप कर मरे गए ३ बच्चो के विरुद्ध किए गए ओप्रशन का परिणाम था , जिसमे IDF ने OPERATION BROTHER KEEPER – किया और हमास के मिलिटरी लीडर्स को पकड़ने की कोशिश की। अपने लीडर्स को बचाने और हमास संगठन की गलती पर पर्दा डालते हुए , हमास ने इजराइल पर रॉकेट्स लॉच कर दिए जवाब मैं इजराइल ने भी यही किआ , और भुगतान गाजा लोगो अपनी जान देकर करना पड़ा।

इजराइल और पलिस्तीन के संघर्ष का निष्कर्ष –

तो दोस्तों ये पूरा आर्टिकल पढ़कर आप सभी समज तो गए ही होंगे की गलती किस की है ,Basicaly जो लोग मुस्लिम लोगो के प्रति अपनी भावना गलत रखते है उनकी नजर मैं , पलिस्तीनी लोग ही गलत है ,

एक हद तक देख जाए तो उन्हें गलत मान ना सही नहीं क्योकि , PLO हो या Hamas ये दोनों ही संगठन चाहते है की पलिस्तीनियो को उनके अधिकार वापस मिल जाए।

मैं मानता हु की इस दोनों संगठनों की सोच इस से कहि ऊपर है ये दोनों संगठन पूरी दुनिया के नक़्शे से इजराइल का नाम ही मिटा देना चाहते है। हलाकि पिछले कुछ दिनों मैं हुए हमलो पर हम नजर डाले तो ये दोनों देश अपने आप को सही साबित कर ने के लिए , काफी दलीले दे सकते है।

व्ही दूसरी तरफ इजराइल को गलत ठहरना भी सही नहीं क्योकि वो अपनी सर जमी की रक्षा मैं लगा है , पर है इजराइल की विस्तारवादी नीतियों को भी नज़रअंदाज नहीं किआ जा सकता है।

मेरी नजर मैं ये दोनों देशो के लोगो के राजनितिक सदस्यों के बिच उलझा हुआ मसला है , जिस मैं आम लोग अपनी जान गवा रहे है। कृपया अपने सुझाव आप हमे कम्मेंट कर के भी बता सकते है।

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3 Replies to “Israel Palestine conflict 2021 – इजराइल और पलिस्तीन के बिच संघर्ष (Who is right) ?”

  1. Superb Article Sir , You Just Wrote Every Information About Israel And Palestine Here.
    Thanks For Providing Such A Beautiful Content .

    Regards –
    Somya Bhatt

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