माँ तो बस माँ होती है !

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक बार फिर से अपने पसंदीदा ब्लॉग पर –
आज का ब्लॉग एक दम खास है ,
क्योकि आज उसका दिन है , जिससे मेरे सारे दिन शुरू होते है , जिसकी छाया के निचे मेरी राते चैन से सोती है –

हा दोस्तों सही समझा आपने आज mothers Day है।

आप सभी को हैप्पी mothers day – में कामना करता हु आप और आपका परिवार इस महामारी से बचा रहे , और हमेशा खुशाल रहे।
आज मैंने एक कविता लिखी है ,


उसके लिए जिसे बना कर , भगवान खुद मेरी ज़िन्दगी में दूसरे पद पर विराजमान है ,
आखिर उसने भी माँ जैसा अदभूत किरदार बनाया है , शायद इसलिए उसे खुद पर इतना गुमान है।

बना कर माँ जैसे – किरदार को , वो खुद भी अब किसी कश्म – कश में खोया होगा ,
अपने हाथो जीता जागता भगवान बना कर , वो खुद भी उस रात रोया होगा।

एक बेटा होने के नाते में ये समझता हु , की हमारी ज़िन्दगी सबसे ज्यादा अहमियत माँ की होती है।
जानता हु में की सहमत आप भी है मेरी इस बात से , क्योकि माँ तो बा माँ होती है।

पेश है कविता माँ के लिए

लिखा जो मैंने google पर , की किसके प्यार में सच्ची वफ़ा होती है ,
बेशक मुझे जवाब माँ ही मिला दोस्तों , क्योकि उसे भी पता है – माँ तो बस माँ होती है।

मेरे बचपन से लेकर अपने भूड़ापे तक , उसे आज भी मेरी उतनी ही परवाह होती है ,
आखिर में बात भी तो माँ की कर रहा हु ए ग़ालिब , और – माँ तो बस माँ होती है।

पूरा दिन ऑफिस में भूका ना रहु में , उसे हर रात इस बात की परवाह होती है ,
आखिर में बात भी तो माँ की कर रहा हु ए ग़ालिब , और – माँ तो बस माँ होती है।

खुलती है जब आँखे सुबह मेरी , वो किचन में फिर कड़ी उसी जगहा होती है ,
बेशक उसकी नींद नहीं होती होगी पूरी , पर आखिर – माँ तो बस माँ होती है।

दिन भर की थकी हुई बेचारी , अचानक से शाम को खुद के प्रति लापरवाह होती है ,
बेशक उसे अपनी तबियत से ज्यादा मेरी सेहत की परवाह है, क्योकि – माँ तो बस माँ होती है।

मेरी ख़ुशी में उसे अपनी ख़ुशी नजर आती है , वो कुछ इस कदर मुकदर-ए-खुदा होती है ,
दबा लेती है मेरे लिए , वो अपने कुछ इच्छाए भी शायद , क्योकि – माँ तो बस माँ होती है।

हो लाख बलाए सर पर मेरे , खैरियत हू ,क्योकि सर पर हमेशा मेरे उसकी दुआ होती है ,
वो बे- वजह भी लड़ लेती है मेरे लिए दुनिया से ए ग़ालिब , क्योकि – माँ तो बस माँ होती है।

लाख बदतर हो दिन भले ही उसका , पर उसे हमेशा मेरे दिन की ही परवाह होती है ,
मेरे खातिर वो खुद आधे पेट सो जाती है शायद , क्योकि – माँ तो बस माँ होती है।

वो महीनो निकाल देती है , एक साडी में लेकिन , उसे मेरे स्कूल के यूनिफार्म की परवाह होती है ,
जेवर भी गिरवी रख सकती है , वो मेरे लिए अपने , क्योकि – माँ तो बस माँ होती है।

हो कोई परेशानी अगर मुझे , वो खड़ी मेरे साथ एक वकील की तरह होती है ,
पता उसे मेरी गलती का भी होता है , पर आखिर माँ तो बस माँ होती है।

सुन लेती है मेरी गलती पर , लाख ताने भी दुनिया से वो , फिर भी वो मेरे साथ हर जगहा होती है ,
हर बार बचा लाती है , मुझे वो दुनिया से , आखिर माँ तो बस माँ होती है।

अगर मौजूद ना भी हो वो इस धरती पर अब , तो भी बन के साये की तरह वो हर जगहा होती है ,
उसकी रूह भी करती है , फिकर तुम्हारी ए ग़ालिब , क्योकि – माँ तो बस माँ होती है।

ना जानती है वो ये Mothers day वगेरा , ना ही उसे अपने जन्म दिन की परवाह होती है ,
मेरी ख़ुशी में वो अपनी ख़ुशी भी ढूंढ लेती है ग़ालिब , आखिर – माँ तो बस माँ होती है।

By –

Admin

Govind Kumawat

दोस्तों में आशा करता हू की आपको मेरी ये कविता पसंद आई हो ,
अगर आपको मेरी ये कविता अछि लगी हो तो प्लीज इसे शेयर करना ना भूले
आप सभी का बहोत – बहोत धन्यवाद।

13 Replies to “माँ तो बस माँ होती है !”

  1. likhte bhot acha ho sir ap, per logo achi chije pdne ki adet nhi hai sir.
    ma se judi is kavita perr apki ek_ek bat mere dil ko chu gai.
    Thanks sir for writhing this beautiful poetry.

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  3. awesome blog ….awesome poerty …dil ko chu gai ek ek lines aur ek ek word ghrai se likha hai jiska mean shayad hi koi smj pay ….logo ke liy y kavita hai but esme bhut kuch chupa h maa ke liy

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