कोरोना बनाम ज़िन्दगी ! – #CORONA VIRUAS

हेलो दोस्तों ! कैसे आप सभी ,

में आशा करता हु की , आप सभी ठीक होंगे।

आज में लिखने जा रहा हु एक बहुत ही शानदार ब्लॉग ,कृपया आप लोग अपना अमूल्य समय निकाल कर इसे जरूर पड़े।
आज का ब्लॉग खास है, क्योकि इसमें खास बात है। जैसा की मेरे आज के ब्लॉग का Titel है , कोरोना बनाम ज़िन्दगी !

कोरोना इससे तो देश का हाल बेहाल है , और ज़िन्दगी ! – इसमें तो उतार- चढ़ाव चलते ही रहते है। पर corona Disease के चलते हुए जो लोगो की ज़िन्दगी में बदलाव आए है मैंने उन्हें इस ब्लॉग में लिख कर आपसे शेयर करने की कोशिश की है।

आलम कुछ ऐसा है , दोस्तों –

कल तक मोबाइल और pc के लिए तरसते थे जो बच्चे , उन्हें आजकल दोस्तों , क्रिकेट मैच की यद् सत्ता रही है।

समय तो हर किसी का आता है दोस्तों , और इस वक़्त ज़िन्दगी खुशनुमा पलो की अहमियत बता रही है।

जो अपने आप को खुदा समझते थे , आजकल वो भी मंदिर – मस्जिद में सर झुकाते है ,

कल तक तो खुदा से बेख़बर थे वो , फिर क्यों आज वो जल – और चादर चढ़ाते है।

कल तक बड़ी – बड़ी ट्रॉलियों में सामान खरीदते थे लोग , आजकल उन्हें भी मैंने छोटी – छोटी थेलियो में सामान लाते देखा है ,

जो कल अपने गांव के लोगो को ग्वार कहके छोड़ आए थे , आज मैंने उन्हें फिर एक बार गांव की और वापस जाते देखा है।

मुकम्बल तो तू भी नहीं होगा CORONA जैसी बीमारी को बनाने वाले , आँख खोल के देख तूने दुनिया का क्या हाल किया है ,

पर हा शुक्रिया करता हु दिल से तेरा में , क्योकि तूने लोगो को खुदा से फिर इंसान बना दिया है।

कल तक रात दिन कोशिश करते थे जो , अपना वर्चस्व बढ़ाने की ,

आजकल कोशिश में लगे है वो भी , ज़िन्दगी बचाने की।

हा अभी भी कुछ लोग बेख़बर है , तेरी इस तभाही से ,

पर वो सोने की थाली में खाते है ग़ालिब – , उन्हें क्या करना तेरी इस गुमाइश से।

अपनी ही दुकान का मालिक , आज कल चोरो की तरह उसे खोल रहा है ,

बचे भूके है शायद उसके , वरना दिल तो उसका कब से ना बोल रहा है।

कहते है , सरकारी कर्मचरी घर बैठो , क्या एक बार में तुम्हे बात समज नहीं आती है ,

मजदूरों को भी पैसा नहीं मिलता समय पर यहाँ , खेर तुम्हारी तो तनख्वा फिर भी समय पर आती है ।

कल तक अपने बने फिरते थे जो , तेरी मेहरबानी से वो शख्सियत भी बेनकाब हो गयी है,

मांग ली मदद कल उनसे तो पता चेला , अचानक से तबियत उनकी भी खराब हो गयी है।

जा रहा था काम से कहि , रास्ते में लगी एक घटना बहोत असहनीय ,

पर पेपर में छापा – वारदातों पर ध्यान न दे , आप बस मास्क पहनिए।

आगे जो पढ़ा अख़बार मैंने , तो पता चला ए-कोरोना तेरी एक दवाई आयी है ,

छोटे – छोटे शब्दों में शायद ये भी लिखा था , सरकार ने दवा पर GST भी लगाई है।

थोड़ा और जो पढ़ा अख़बार मैंने , पता चला की कोरोना से आजकल बंगाल के हालत भी ख़राब थे ,

कल तक कोरोना की खबर भी नहीं थी वहा , फिर याद आया की तब बंगाल में तो चुनाव थे

!

फिर पड़ा की , बाप की डेड बॉडी मांगने पर अस्पताल के डॉक्टर ने बेटे को थपड खेच दिया है ,

हम तो उन्हें हीरो समझने लगे थे , पर उन्होंने तो अपना ज़मीर बेच दिया है।

चारो तरफ तो पता चला कालाबाजारी में लगे थे लोग , आखिर इतना पैसा लेकर तू कहा जाएगा ,

सुना है कब्र में जेब तो होती नहीं है , फिर तो तेरा ये कमाया हुआ तो यही रह जाएगा।

फिर एक दिन अख़बार में छपा की ,बढ़ते हुए इन कसो में कमी आई है ,

अगले पेज पर लिखा था , ऐसा कुछ नहीं है ये बस टेस्टिंग में ढिलाई है।

पढ़ा जो पांचवा पेज मैंने , उसमे दो लोगो की अच्छे सामाजिक कार्यो के लिए फोटो आई थी ,

फ्रंट पेज पर फोटो छप्पी थी किसी की , याद आया उस दिन कोहली ने वैक्सीन लगवाई थी।

TRP – का भूखा मीडिया , शायद खुद ही खबरे बनाने लगा है ,

इंसान को इंसान से नफरत होने लगी है , इसलिए अंत भी नजदीक आने लगा है।

पशु – पक्षी को खा जाए ये निर्भरता बनाई थी उसने शायद , जीवन – चक्र चलाने के लिए ,

एक प्राणी को ज्यादा दिमाग दिया उसने , और वो रेसिपी ढूंढ़ने लगा इंसाने खाने के लिए।

सोने के लिए वक़्त ढूंढ़ती आखो में भी आजकल मैंने बेरोजगारी का डर देखा है ,अख़बार को हाथ नहीं लगाने वाले लोगो को भी मैंने आजकल कोरोना की खबर पड़ते देखा है।

बेबस सी ज़िन्दगी अब और मासूम हो गई है , सुबह से सोने की कोशिश कर रहा हु और कलवटे बदलते शाम हो गई है।

Govind Kumawat
Govind Kumawat

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14 Replies to “कोरोना बनाम ज़िन्दगी ! – #CORONA VIRUAS”

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