मुंबई पुलिस को महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर 252 करोड़ रुपए का एक बजट मिला है। इस बजट में चुनिंदा जगहों पर पैनिक बटन लगाने के साथ ही अपराध हॉटस्पॉट की मैपिंग करना और हवाई सर्वे किया जाएगा। हाल ही में इस प्रोजेक्ट को इजाजत मिली है और अपेक्षा है कि इसके लिए किसी परियोजना प्रबंधन सलाहकार की सेवाएं ली जाएंगी। पैनिक बटन को शहर के विभिन्न स्थानों पर लगाया जाएगा। जैसे ही इन्हें कोई दबाएगा यह अपने आप पुलिस कंट्रोल रुम में एक अलार्म बज जाएगा जिसके बाद पेट्रोलिंग कर रहे नजदीकी पुलिस वाले तुरंत पीड़िता के पास पहुंच जाएंगे।
परियोजना के तहत आरोपियों को पकड़ने के लिए दुपहिया वाहनों में भी डैश कैमरा लगाया जाएगा। महाराष्ट्र गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘शहर में इन पैनिक बटन को इंस्टॉल करने से पहले हम अपराधियों के अड्डों की भौगोलिक सूचना प्रणाली के बारे में सूचना इकट्ठा करेंगे। इसके बाद जिन स्थानों पर महिलाओं के साथ अपराध जैसे कि बलात्कार, छेड़छाड़, जबरन छूना या इस तरह की घटनाएं होती हैं वहां पैनिक बटन लगाए जाएंगे। अपराधी पैनोरामिक कैमरा के जरिए सीसीटीवी फुटेज के अंतर्गत आ जाएंगे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कि फेस रिकगनिशन और दूसरे वीडियो एनालिटिकल स्किल रीयल टाइम में सूचना प्रदान करने का काम करेगी जो पेट्रोलिंग कर रही टीम को त्वरित कार्रवाई करने में मदद करेगा।’
16 दिसबंर, 2012 को दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने एक निर्भया फंड की घोषणा की थी। इस फंड के जरिए महिला सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए पैसे आवंटित किए जाते हैं। मार्च में केंद्र सरकार ने 2,919 करोड़ रुपए के एक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी जिसके तहत 8 शहरों को सुरक्षित शहरों में बदला जाना था। मुंबई पुलिस के आयुक्त (अपराध) केएमएम प्रसन्ना ने 252 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का प्रस्ताव दिया था जिसे मंजूर कर लिया गया है। इसके साथ ही निर्भया फंड का इस्तेमाल करने वाला मुंबई पहला राज्य बन गया है।

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